पुस्तकों से सोशल मीडिया के कारण दूरी जरूर बढी है लेकिन पुस्तकों का महत्व कम नहीं हुआ है : प्रेमचंद द्वितीय

इंदौर। पुस्तकों से मनुष्य का गहरा नाता है। डिजिटल दौर में किताब का महत्व जरूर कम हुआ है, लेकिन पुस्तकों का महत्व कम नहीं हुआ है। सोशल मीडिया ने किताबों को पढ़ने की आदत को भी प्रभावित किया है लेकिन यह इसी सोशल मीडिया से किताबों के प्रचार-प्रसार को भी बल मिला है। व्यंग्य और कविता अलग-अलग विधा जरूर है लेकिन दोनों में जीवन का ऑब्जरवेशन निहित है।
यह बात सुप्रसिद्ध व्यंग्यकार डॉ. प्रेमचंद द्वितीय ने विद्योत्तमा साहित्य फाउंडेशन की इंदौर इकाई के पुस्तक चर्चा एवं काव्य संगोष्ठी समारोह में कही। प्रारम्भ में डॉ. प्रेमचंद द्वितीय का स्वागत कवि, लेखक व समीक्षक संजय एम तराणेकर ने किया। दिवंगत कवि कल्याण सिंह केसर की स्मृति में अखिल भारतीय संस्था विद्योत्तमा द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम के अध्यक्ष वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. अखिलेश राव मुख्य अतिथि के रूप में और प्रसिद्ध व्यंग्यकार प्रेमचंद द्वितीय एवं सारस्वत अतिथि के रूप में वरिष्ठ साहित्यकार एवं अधिवक्ता प्रवीण चौधरी उपस्थित थे। उनके एवं गोपाल सिंह राजपूत के द्वारा दिवंगत कवि एवं पुस्तक के बारे में चर्चा की गई। चर्चा में भाग लेते समय वे भावुक भी हो गए। उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर महत्वपूर्ण सारगर्भित व्याख्यान दिया गया। यह आयोजन इंदौर इकाई के अध्यक्ष साहित्य मर्मज्ञ दिनेश तिवारी “उपवन” द्वारा किया गया। इस अभिनव आयोजन की शुरुआत डॉ शशि निगम द्वारा सरस्वती वंदना से की गई। कुशल संयोजन कल्याणी गुप्ता कृति द्वारा किया गया।
कार्यक्रम में वरिष्ठ साहित्यकार संध्या बाईवार, डॉ. इंदु जैन, सुरेश माहेश्वरी शिवम, हरीश हंस, संजय एम तराणेकर, डॉ. अर्चना त्रिवेदी, शीला चंदन, स्वाति सिंह राठौर साहिबा, तेजकरण दुबे तेज द्वारा काव्यपाठ किया गया। इस पुनीत अवसर पर समाजसेवी कमल तिवारी, लेखक हरिहर सिंह चौहान, व्यंग्य लेखक दिनेश गंगराड़े, महेंद्र सिंह गहलोत, दिलीप नीमा, आशिक हुसैन देवासवाला, अर्पण जैन, प्रेस क्लब कोषाध्यक्ष मुकेश तिवारी और पवन सोलंकी आदि उपस्थित थे।



