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बड़ा उदासीन अखाड़े में संपत्तियों की बंदरबांट, रजिस्ट्रार ने लेन-देन पर लगाई रोक

-महंतों की शिकायत पर कार्रवाई

– इंदौर गेट स्थित संपत्तियों को नियम विरुद्ध पट्टे पर देने का आरोप

– अखाड़ा परिषद भी करेगा हस्तक्षेप

उज्जैन (राजेंद्र पुरोहित)। श्री पंचायती बड़ा उदासीन अखाड़ा में चल रहे आंतरिक विवाद के बीच उज्जैन स्थित संपत्तियों को नियम विरुद्ध लीज और पट्टे पर देने का मामला सामने आया है। अखाड़े के महंत रघुमुनि महाराज सहित अन्य महंतों की शिकायत पर रजिस्ट्रार सोसाइटीज ने अखाड़े के लेन-देन पर रोक लगा दी है। आरोप है कि अखाड़े के भूरी का अड्डा इंदौर गेट स्थित कई संपत्तियों को अनधिकृत रूप से पट्टे पर देकर मोटी कमाई की जा रही है।

अखाड़े के संतों का आरोप है कि स्वयंभू मुखिया महंत दुर्गादास ने न्यायालय के आदेशों का उल्लंघन करते हुए 9 जुलाई 2026 को कांचीपुरम में अवैध कार्यकारिणी की बैठक की। इसमें जबरन उत्तर पंगत के मुखिया महंत का चुनाव कर लिया गया और विरोध करने वाले पांच महंतों को निष्कासित करने का फरमान जारी कर दिया गया। संतों के अनुसार अखाड़े की नियमावली में किसी महंत को आजीवन बहिष्कृत करने का कोई प्रावधान ही नहीं है।

अखाड़े के खातों के लेन-देन पर प्रतिबंध

दुर्गादास द्वारा धन के कथित दुरुपयोग को देखते हुए रजिस्ट्रार सोसाइटीज एवं चिट्स ने 9 सितंबर 2024 को अखाड़े के सभी आश्रमों के खातों की जांच के आदेश दिए थे। जांच में सहयोग न करने पर रजिस्ट्रार ने 23 अप्रैल 2026 को आदेश जारी कर अखाड़े के सभी लेन-देन प्रतिबंधित कर दिए हैं। वर्तमान में केवल अति आवश्यक खर्चों की ही अनुमति दी गई है।

न्यायालय के आदेशों की अनदेखी और गबन के आरोप

प्रयागराज न्यायालय ने 23 मई 2023 को महंत रघुमुनि के निष्कासन को अवैध ठहराया था। वहीं, इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 8 अगस्त 2025 को दुर्गादास द्वारा नई कार्यकारिणी के गठन को वैध नहीं माना है। संतों का आरोप है कि दुर्गादास ने 2025 के प्रयागराज कुंभ से पूर्व फर्जी तरीके से रामनवमी दास को मुखिया घोषित किया था, जबकि इस पद पर रघुमुनि महाराज के पक्ष में न्यायालय का स्टे है। इसके अलावा हरिद्वार में स्वर्गीय महंत निरंजन दास के 40 लाख रुपये के आभूषण गायब कर दिए गए। उनके खाते से 50 लाख रुपये निकालने का प्रयास भी किया गया, जिसे मैनेजर की सतर्कता से रोक लिया गया।

तीनों महंतों का हो चुका है सामाजिक बहिष्कार

अखाड़े के नियमों के खिलाफ काम करने पर संपूर्ण भारत के उदासीन संत-महंतों ने बैठक कर महंत दुर्गादास, महंत अद्वैतानंद और महंत महेश्वरदास का सामाजिक बहिष्कार किया हुआ है। इन्हें अखाड़े के किसी भी मंदिर या आश्रम में प्रवेश की अनुमति नहीं है। आरोप है कि दुर्गादास और उनके सहयोगी आश्रमों से अवैध वसूली कर रहे हैं।

चार राज्यों की सरकारों से शिकायत करेगा अखाड़ा परिषद

बड़ा उदासीन अखाड़े के मुखिया महंत रघुमुनि महाराज ने बताया कि अखाड़े की परंपराओं के विपरीत कार्य होने पर संपत्तियों को बचाने के लिए न्यायालय सहित अन्य स्थानों पर शिकायत की गई है। वहीं, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष डॉ. रवींद्र पुरी महाराज ने कहा कि उन्हें भी बड़ा उदासीन अखाड़े की ओर से शिकायत मिली है। जल्द ही अखाड़ा परिषद की बैठक कर इस पूरे मामले से उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र सरकार को अवगत कराया जाएगा।

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