सनातन शिक्षा की महानता: उज्जैन में नैक चेयरमैन प्राे. नागेश्वर राव बोले- ज्ञान का संवाहक हैं गुरु, कुलगुरु ने धोए अपनी गुरु मां के चरण

–मातृ संस्था और गुरु निष्ठा की अनूठी मिसाल:’गुरु सान्दीपनि सम्मान’ से 40 से अधिक पूर्व आचार्यों को किया सम्मानित
उज्जैन 30 जुलाई। सम्राट् विक्रमादित्य विश्वविद्यालय, उज्जैन एवं उच्च शिक्षा विभाग, उज्जैन संभाग द्वारा गुरू पूर्णिमा पर नव निर्मित ऑडिटोरियम गीता भवन में गुरु सान्दीपनि सम्मान समारोह का आयोजन राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) की कार्यकारी समिति (ईसी) के चेयरमैन प्रो. नागेश्वर राव के मुख्य आतिथ्य मे मनाया गया।अध्यक्षता प्रो. अर्पण भारद्वाज कुलगुरु, सम्राट् विक्रमादित्य ने की। इस अवसर पर विश्वविद्यालय और महाविद्यालयों से सेवानिवृत्त आचार्यों को सम्मानित करके गुरुओं का पाद पूजन किया, इसमें कुलगुरु प्रो. अर्पण भारद्वाज ने अपनी गुरु प्रो. उमा शर्मा का भी पाद पूजन किया। इस अवसर पर वक्ताओं ने गुरु महिमा बताते हुए गुरु को सूक्ष्म शक्ति का निरूपित किया
श्री गीता भवन ऑडिटोरियम, देवास रोड, शासकीय माधव विज्ञान महाविद्यालय के पास, उज्जैन पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि प्रो. नागेश्वर राव ने अपने उद्बोधन में कहा कि गुरु ज्ञान के कारण ही बातें समझने और ज्ञान प्राप्त करने में आसानी होती हैं इसलिए सनातन और भारतीय परम्परा में गुरु पूर्णिमा का महत्व है, इसी महत्व के कारण सनातन शिक्षा सर्वोपरि है।
अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए कुलगुरु प्रो. अर्पण भारद्वाज ने कहा कि यह दिन गुरु – शिष्य के अभिनंदन का है, यह गुरुओं और अपनी मातृ संस्थाओं के प्रति समर्पण का भी दिन है और हमारे संकल्प के साथ समर्पित करने का दिन है, जिसे इस प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने निभाया है। यह भव्य और विशाल ऑडिटोरियम उन्होंने अपनी मातृ संस्था को समर्पित करके इसे पूर्ण किया है।
शासकीय माधव विज्ञान महाविद्यालय उज्जैन की हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. शशि जोशी ने सम्बोधित करते हुए कहा कि, गुरु सूक्ष्म दृष्टि प्रदान करता है, वही सदगुरु भी कहलाता है।
सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय की अंग्रेजी अध्ययनशाला की विभागाध्यक्ष प्रो. अंजना पाण्डेय ने कहा कि पाश्चात्य शिक्षा शिक्षित करती हैं लेकिन भारत की नई शिक्षा नीति विद्यार्थियों को संस्कार देने के साथ शुद्धिकरण भी करती हैं।
इस अवसर पर गुरुओं का पाद पूजन किया गया जिनमें कुलगुरु प्रो. अर्पण भारद्वाज ने अपनी गुरु प्रो. उमा शर्मा के चरणों को धोकर उनका पूजन किया। इसी तरह विद्यार्थियों ने अपने अपने गुरुओ का पाद पूजन किया।
प्रारम्भ में अतिथियों ने दीपदीपन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। तत्पश्चात विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी। मंच पर पूर्व कुलगुरु डॉ. बालकृष्ण शर्मा, प्रो. केदारनारायण जोशी, महर्षि पाणिनि संस्कृत, वैदिक विश्वविद्यालय उज्जैन के कुलगुरु प्राे. शिवशंकर मिश्रा, शा . माधव विज्ञान महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. हरीश व्यास, शा. कालिदास कन्या महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. वंदना गुप्ता, सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. अनिल कुमार शर्मा, उच्च शिक्षा, उज्जैन संभाग, उज्जैन के अतिरिक्त संचालक डॉ. एच.एल.अनिजवाल आदि उपस्थित थे। कार्यक्रम में 40 से अधिक सेवानिवृत्त आचार्यों को सम्मानित किया गया। जिनमें शामिल रहे प्रो.गोपालकृष्ण , प्रो. केदारनारायण जोशी, प्रो. पीपी वशिष्ठ, प्रो. बीडी श्रीवास्तव, प्रो. शारदा शिंदे, प्रो. नागेश शिंदे आदि। कार्यक्रम का संचालन डॉ. प्रीति पाण्डेय ने किया और आभार प्रदर्शन डॉ. अनिल कुमार शर्मा कुलसचिव सम्राट् विक्रमादित्य विश्वविद्यालय, उज्जैन ने किया।



