उज्जैन के जहरीले चेंबर में एक की मौत, दो की हालत गंभीर






–टाटा कंपनी की सीवर लाइन चेंबर में कर्मचारियों के साथ हादसा
— पुलिस कप्तान घटना स्थल पहुंचे
उज्जैन। उज्जैन शहर में सीवर लाइन के लिए टाटा कंपनी ने ठेका ले रखा है। जिन क्षेत्रों में सीवर लाइन बिछ गई है, वहां कंपनी द्वारा चैंबर बनाए गए हैं। इन चैंबरों के चौक होने पर उनकी सफाई तथा रखरखाव के लिए कर्मचारी तैनात है। मंगलवार की दोपहर में सीवर लाइन ठीक करने के लिए पहुंचे तीन कर्मचारी एक के बाद एक चेंबर में उतरे। अंदर उतरने ही वे जहरीली गैस के प्रभाव में आ गए। एक कर्मचारी उतरा तो कोई हलचल नहीं हुई। जब दूसरा उतरा तो वह भी गहरी जहरीली गैस से प्रभावित हो गया। फिर तीसरा कर्मचारी उन्हें निकालने के लिए उतरा तो वह भी जहरीली गैस के प्रभाव में आ गया। यह घटना पिपलीनाका-भैरवगढ़ मार्ग स्थित ग्यारसी नगर के समीप की है।
इस घटना को राह चलते एवं आसपास के लोगों ने देखी तो इसकी सूचना तत्काल 112 पर की गई। संयोग से पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा भी घटनास्थल पर पहुंच गए। उनके पहुंचने से सुप्रबंध व्यवस्था हो गई। इधर क्षेत्रीय पार्षद हेमंत गहलोत (भूरू भैया) भी पहुंच गए। उन्होंने क्षेत्रीय नागरिकों और जांबाज युवकों के सहयोग से चेंबर में बेहोश हुए कर्मचारियों को बाहर निकलवाया। पुलिस अधीक्षक ने तत्काल बेहोश तीनों कर्मचारियों को अस्पताल पहुंचाया, जहां उनका तत्काल से उपचार प्रारंभ हो गया।
अस्पताल सूत्रों से जानकारी मिली है कि एक कर्मचारी को जहरीली गैस से अधिक प्रभावित होने की वजह से उसे बचाया नहीं जा सका। जबकि दोनों कर्मचारियों का इलाज अस्पताल में जारी है। उनकी स्थिति भी गंभीर बताई गई हैं। डॉक्टरों टीम इन कर्मचारियों को बचाने में जुटी है।
जहरीली गैस से प्रभावित हुए कर्मचारी रतलाम एवं उज्जैन जिले के बताए गए हैं। आलोट तहसील के सालाखेड़ी गांव के एक कर्मचारी अशोक की मौत होने की खबर है। रमेश पिता निवासी आलोट एवं गोपाल पिता थावर निवासी इलासपुरी तहसील घटिया जिला उज्जैन उज्जैन अस्पताल में भर्ती बताए गए हैं।
घटना की फिर से पुनरावृत्ति नहीं हो
सीवर लाइन के चेंबर में जहरीली गैस बनने के अमूमन शिकायतें रहती हैं। इस घटना से नगर निगम को सबक लेना चाहिए। सीवर लाइन में लगे कर्मचारियों की हिफाजत की जाना चाहिए। साफ सफाई हो या तकनीकी खराबी, उसे ठीक करने के पूर्व आवश्यक जांच पड़ताल करवानी चाहिए। उसके बाद ही चेंबर में कर्मचारी उतारे जाए। चेंबर में जहरीली गैस का प्रभाव दिखाई दे तो उसमें वे नहीं उतरे। इसके साथ यह भी हिदायत दी जाना चाहिए कि चेंबर में एक साथ दो-तीन कर्मचारी नहीं उतरे। जब एक व्यक्ति सुरक्षित दिखाई दे तभी किसी अन्य सहयोगी कर्मचारी को चेंबर में उतारे। इसके साथ ही चेंबर में उतरने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए एक सुरक्षा किट भी उपलब्ध रहना चाहिए, जो संभावित घटनाओं के समय बचाव कर सके। इस कार्य में लगे कर्मचारियों का 10-15 लाख रुपए का बीमा भी कराया जाना अनिवार्य होना चाहिए। लापरवाही बरतने वाली कंपनी एवं ठेकेदार को जिम्मेदार मानते हुए उनके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई भी की जाना चाहिए।



