अंतरराष्ट्रीय

खूबसूरत वेनिस, जिसे कहते हैं सिटी ऑफ केनाल्स

यात्रा संस्मरण -(4)

-रोम के बीच में बसा देश: वेटिकन सिटी
इटली और वेटिकन सिटी के भ्रमण के साथ हुई यात्रा सम्पन्न
डाॅ. चन्दर सोनाने
फ्रांस, स्वीट्जरलैंड, आस्ट्रिया और लींचस्टीन देशों के भ्रमण के बाद 64 यात्रियों का यह ग्रुप इन्स्ब्रुक से इटली देश के वेनिस और रोम तथा वेटिकन सिटी की यात्रा के लिए निकला। 9 रात और 10 दिन के इस भ्रमण के दौरान हमारी यात्रा के 6 दिन पूरे हो गए थे। यात्रा के 4 दिन और शेष बचे थे। पिछली शानदार यात्रा के बाद आगे की यात्रा की उत्सुकता हमारे दिलों दिमाग में हावी थी।
इटली का इतिहास, सभ्यता और संस्कृति
दक्षिण यूरोप का देश इटली पश्चिमी सभ्यता का मुख्य केंद्र रहा है। यहाँ की प्राचीन रोमन सभ्यता, कला और पुनर्जागरण ने पूरी दुनिया को बदल दिया। आज भी इसका इतिहास और संस्कृति बहुत मजबूत हैं। रोम शहर की शुरुआत 753 ईसा पूर्व में हुई। बाद में यह एक बड़ा साम्राज्य बना, जिसने कानून, शासन और वास्तुकला की नींव रखी। 14वीं शताब्दी में इटली कला और विज्ञान का केंद्र बना। लियोनार्डो दा विंची और माइकल एंजेलो जैसे महान लोग इसी दौर में आए। आधुनिक इटली सदियों तक बंटे रहने के बाद, साल 1861 में एक देश के रूप में जुड़ा। आज यह एक आधुनिक लोकतांत्रिक देश है। यहाँ कोलॉसीयम, वेटिकन सिटी और पीसा की मीनार जैसी अनूठी इमारतें हैं। इटली में दुनिया के सबसे ज्यादा यूनेस्को धरोहर स्थल हैं। इटालियन खाना जैसे पास्ता और पिज्जा पूरी दुनिया में बहुत पसंद किए जाते हैं। यहाँ के लोग परिवार, संगीत, फैशन और जीवन के हर पल का आनंद लेने को बहुत महत्व देते हैं।
नहरों का शहर वेनिस
वेनिस में 150 से ज्यादा नहरें है। इसी कारण इसका नाम नहरों का शहर पड़ा। छोटे किन्तु पूरे एक द्वीप पर बसा यह खूबसूरत शहर है। शहर में आने जाने के लिए परिवहन का मुख्य साधन नांव ही है। नांव द्वारा ही आना जाना होता है। दुनिया के खूबसूरत देशों में इसकी गिनती होती है। इसकी आबादी करीब 2.50 लाख है। इस शहर के आसपास 118 द्वीप और है। वहां भी आने जाने का मुख्य साधन नांव ही है। बड़ी नांव को यहां गंडोला कहते है। हमने पूरे वेनिस शहर को गंडोला में बैठकर देखा। इस शहर के भ्रमण ने हम सबका मन मोह लिया।
शहर का दिल: सेंट मार्क्स स्क्वायर
यह पर्यटकों के लिए सबसे आकर्षण का केन्द्र है। इसे शहर का दिल भी कहते है। सब यहां खूब पैदल घूमे। यहां भव्य ईमारतें, घंटाघर, गिरजाघर, होटल, रेस्टोरेंट हैं, जो अपने आप में अत्यन्त आकर्षक है। वेनिस के यादगार और रोमांचक यात्रा के बाद हम रोम के लिए निकले। रास्ते में दोपहर में पडुवा में इंडियन रेस्टोरेंट गांधी-2 में लजीज खाना खाया।
पाकिस्तानी रेस्टोरेंट में हिन्दुस्तानी खाना
पडुवा से जब हम रोम के लिए निकले, रास्ता लंबा था। रात्रि में रोम पहुँचे और एक पाकिस्तानी रेस्टोरेंट में हिन्दुस्तानी खाना खाया। उस रेस्टोरेंट का मालिक चमनलाल था। इस रेस्टोरेंट का नाम गांधी-4 था। उससे जब पूछा कि आपने पाकिस्तानी की बजाय हिन्दुस्तानी खाने का रेस्टोरेंट क्यों खोला ? उसका सीधा सा जवाब था। हिन्दुस्तानी खाना दुनियाभर में प्रसिद्ध है। इसलिए उसने गांधी-4 की फ्रेंचाईजी ली। उसने सबको स्वादिष्ट हिन्दुस्तानी खाना परोसा।
7 पहाड़ियों का शहर रोम
रोम को शाश्वत नगर और 7 पहाड़ियों का शहर भी कहते हैं। यह शहर अपनी प्राचीन सभ्यता और संस्कृति के प्रमुख केन्द्र के रूप में दुनियाभर में प्रसिद्ध है। यहां की भाषा इटालियन और मुद्रा यूरो ही चलती है। रोम शहर की आबादी करीब 27 लाख है। रोम की प्राचीन ईमारतें और जल सेतु में कांक्रीट का इस्तेमाल सबसे पहले रोम में ही होना माना जाता है।
7 आश्चर्य में एक: पीसा की झुकी हुई मीनार
रोम में पीसा की झुकी हुई मीनार को देख सब आश्चर्य में पड़ गए। यह दुनिया के 7 आश्चर्य में एक है। यह 1173 में बनीं। यह 8 मंजिला है और 56 मीटर ऊँची है। इसकी अद्भुत कहानी है। यह जब बनाई जा रही थी तब यह 4 डिग्री झुक गई। तब काम रोक दिया गया। विशेषज्ञों ने अनेक जांचे की और इसे गिरने से बचाने के बहुत उपाय किए गए। इस कारण से यह आज भी यह टिकी हुई और झुकी हुई है।
नये सात आश्चर्योें में एक कोलॉसीयम
रोम का कोलॉसीयम दुनिया के सबसे प्रसिद्ध और ऐतिहासिक स्थलों में से एक है। यह इटली की राजधानी रोम में स्थित एक विशाल अंडाकार एम्फीथिएटर (अखाड़ा) है, जिसे प्राचीन रोमन साम्राज्य की इंजीनियरिंग का एक अद्भुत नमूना माना जाता है। इसका निर्माण 72 ईस्वी में सम्राट वेस्पेशियन के शासनकाल में शुरू हुआ था और 80 ईस्वी में उनके बेटे टाइटस के समय यह पूरा हुआ। इसे बनाने में मुख्य रूप से कंक्रीट, चूना पत्थर और ईंटों का उपयोग किया गया था। इसे दुनिया के नए सात अजूबों में शामिल किया गया है। प्राचीन समय में यहाँ ग्लेडियेटर्स (योद्धाओं) के बीच खूनी लड़ाई होती थी। वे अपनी जान बचाने के लिए एक-दूसरे से या हिंसक जानवरों जैसे शेर, चीते से लड़ते थे। इस विशाल अखाड़े में एक साथ 50,000 से 80,000 लोग बैठ सकते थे, जो उस समय के हिसाब से बहुत बड़ी संख्या थी। कोलॉसीयम को देखकर हम सब आश्चर्य में पड़ गए और उस समय की वास्तुशिल्प की सबने सराहना की।
800 की आबादी वाला देश: वेटिकन सिटी –
रोम के बीच में बसा यह एक खूबसूरत देश है, जिसका नाम है वेटिकन सिटी। इसकी आबादी मात्र 800 है। इसका क्षेत्रफल भी केवल 0.44 कि.मी है। यानी आधा कि.मी से भी कम। इसकी भाषा लेटिन है। यहां मुद्रा यूरो ही चलती है। यहां कैथोलिक ईसाईयों के सबसे बड़े धर्मगुरू पोप का निवास स्थान है। इसका विशाल और भव्य परिसर तथा चारों ओर से शानदार ईमारतें और भवन बरबस सबका मन मोह लेते है। यहां कोई टोपी पहनकर नहीं जा सकता। वेटिकन सिटी देखकर सबको एक सूकुन सा महसूस हुआ। यहां सबने आध्यात्मिक शांति महसूस की।
वेटिकन सिटी से बाहर निकलते ही ट्रीवी फाउन्टेन है। यहाँ बड़ी-बड़ी मूर्तियों के सामने शानदार फव्वारा है। यहां मान्यता है कि इस फव्वारें में सिक्का डालने से लोगों की मनोकामना पूरी होती है। सबने यहां खूब फोटो खींचे और कुछ ने फव्वारे में सिक्के भी डालें। इस प्रकार हमारी यात्रा का अंतिम पड़ाव रोम था। रोम की आकर्षक पीसा की झुकी हुई मीनार, कोलॉसीयम, वेटिकन सिटी और ट्रीवी फाउन्टेन देखकर सबका रोम-रोम पुलकित हो गया। हमारी शानदार, रोमांचक और यादगार यात्रा रोम में सम्पन्न हुई।
रोम में रात्रि विश्राम के बाद अगले दिन रोम से दिल्ली के लिए सबने प्रस्थान किया। 23 जून 2026 को नई दिल्ली से दुबई होते हुए पेरिस से आरम्भ यह यात्रा 2 जुलाई 2026 को रोम से दोहा होते हुए नई दिल्ली में पूरी हुई । प्रस्थान के पूर्व सब यात्रियों ने यूरोप यात्रा के योजनाकार डाॅ. रंजन वर्मा विशद, डाॅ. प्रणव शास्त्री और टूर मैनेजर आलोक जी को इस यादों से भरी रोमांचक यात्रा के लिए आभार व्यक्त किया। सबने अपने दिलों में इस खूबसूरत यात्रा की यादें संजोकर एक-दूसरे से विदा ली। इस प्रकार हमारी 10 दिन की यात्रा सानन्द सम्पन्न हुई।
सारे जहां से अच्छा हिन्दुस्तां हमारा
यूरोप की इस यादगार और रोमांचक यात्रा करने के बाद सहसा हमें अपना देश भारत याद आ जाता है। यहां का प्राकृतिक सौन्दर्य, ऊँची पर्वतीय चोटियों पर आच्छादित बर्फ की चादरें, घने वन, कल-कल बहती नदियों को जब हम याद करते हैं तो अचानक मन से आवाज आती है सारे जहां से अच्छा हिन्दुस्तां हमारा।

(लेखक मध्य प्रदेश शासन ‘जनसंपर्क विभाग’ के सेवानिवृत जनसंपर्क अधिकारी है)

राजेंद्र पुरोहित

वरिष्ठ पत्रकार एवं Editor-in-Chief राजेंद्र पुरोहित पत्रकारिता के क्षेत्र में 40 से अधिक वर्षों का अनुभव रखने वाले वरिष्ठ पत्रकार हैं। उन्होंने नईदुनिया, जागरण, अग्निबाण, सिटी चैनल और साधना न्यूज़ सहित प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में कार्य किया है। मध्य प्रदेश के अधिमान्य पत्रकार राजेंद्र पुरोहित लोक वर्चस्व समाचार पत्र एवं lokvarchasva.in के संस्थापक और Editor-in-Chief हैं।

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