चार दशक से माली समाज की जमीन पर हुआ उज्जैन का विकास, बदले में किसानों को मिली सिर्फ बेरोजगारी

-भाजपा नेता सुरेंद्र सांखला ने सरकार की नीतियों पर उठाए सवाल, भूमि अधिग्रहण के बजाय किसानों को पार्टनर बनाने की मांग
उज्जैन 02जून। अखिल भारतीय माली समाज विकास परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं भाजपा नेता सुरेंद्र सांखला ने उज्जैन के विकास में माली समाज की अनदेखी पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा है कि पिछले 40 सालों से माली समाज के किसानों की कृषि योग्य भूमि लेकर शहर का विकास किया जा रहा है, लेकिन इसके बदले किसानों के रोजगार और पुनर्वास की कोई योजना नहीं बनाई गई।
सांखला ने बताया कि शहर की कॉलोनियों, घाटों के निर्माण, मंदिर विस्तार, कुंभ मेला क्षेत्र, सीलिंग एक्ट और हाउसिंग बोर्ड व प्राधिकरण की योजनाओं के लिए माली समाज की हजारों बीघा जमीन कौड़ियों के दाम ले ली गई। आज उसी जमीन को सरकार पांच से दस हजार रुपये प्रति वर्ग फीट के भाव पर बेच रही है। जिन किसानों की जमीन पर आज पूरा शहर बस गया है, वे किसान बेरोजगारी का दंश झेल रहे हैं।
धार्मिक स्थलों के आसपास विकास के नाम पर किसानों की जमीन अधिग्रहित कर बॉन्ड जारी करने और निजी क्षेत्र से अनुबंध की योजना पर भी सांखला ने आपत्ति जताई है। उन्होंने वैकल्पिक मॉडल का सुझाव देते हुए कहा कि सरकार भूमि अधिग्रहण करने के बजाय किसानों को ही अपना पार्टनर बनाए। सरकार अपना नक्शा दे और किसान उसी के अनुसार अपनी जमीन पर विकास करें। इससे धार्मिक सुविधाओं का विस्तार भी होगा और भूमिहीन हो रहे किसानों को रोजगार भी मिल सकेगा।
माली समाज के साथ हो रहे सामाजिक और राजनीतिक अन्याय का जिक्र करते हुए सांखला ने कहा कि यह समाज सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक रूप से बेहद कमजोर है। संख्या बल अधिक होने के बावजूद समाज को राजनीतिक हिस्सेदारी में पीछे रखा गया है। ओबीसी के इस बड़े वर्ग की जमीनें तो छीन ली गईं, लेकिन उनके विकास और पुनर्स्थापना के लिए कोई कार्यक्रम नहीं चलाया गया।
उन्होंने मांग की है कि उज्जैन के विकास में सबसे बड़ा योगदान देने वाले माली समाज के किसानों को अब भूमिहीन और बेरोजगार करने के बजाय विकास का हिस्सेदार बनाया जाना चाहिए।



