युवाओं का विश्वास जीतना किसी भी कुर्सी से बड़ा है-सुरेन्द्रसिंह बारवा

नई दिल्ली। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए राजस्थान एनसीपी प्रदेश उपाध्यक्ष (संगठन) एवं किसान नेता सुरेन्द्रसिंह बारवा ने कहा कि लोकतंत्र में किसी पद का परिवर्तन अन्त नहीं, बल्कि व्यवस्था के आत्ममंथन और सुधार का अवसर होता है।उन्होंने कहा कि पिछले कुछ समय से देशभर के विद्यार्थियों, प्रतियोगी परीक्षार्थियों और युवाओं ने शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, निष्पक्षता और जवाबदेही की मांग को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की थी। ऐसे समय में यह आवश्यक है कि नई जिम्मेदारी संभालने वाला नेतृत्व युवाओं की अपेक्षाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दे।
उन्होंने कहा कि पिछले कुछ समय से देशभर के विद्यार्थियों, प्रतियोगी परीक्षार्थियों और युवाओं ने शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, निष्पक्षता और जवाबदेही की मांग को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की थी। ऐसे समय में यह आवश्यक है कि नई जिम्मेदारी संभालने वाला नेतृत्व युवाओं की अपेक्षाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दे।
श्री राजपुरोहित ने कहा, “किसी व्यक्ति का इस्तीफा मेरी खुशी का विषय नहीं है। मेरा उद्देश्य किसी व्यक्ति की आलोचना नहीं, बल्कि व्यवस्था को अधिक मजबूत, पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है।”
उन्होंने कहा कि देश का युवा केवल डिग्री नहीं, बल्कि सम्मानजनक भविष्य चाहता है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाला प्रत्येक विद्यार्थी अपने परिवार के सपनों का भार लेकर चलता है। जब व्यवस्था पर प्रश्न उठते हैं, तब सबसे अधिक पीड़ा उसी युवा को होती है जिसने वर्षों तक कठिन परिश्रम किया होता है।
उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि नई शिक्षा नेतृत्व टीम परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता, पारदर्शिता, समयबद्ध भर्ती प्रक्रिया और विद्यार्थियों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दे, ताकि देश के करोड़ों युवाओं का विश्वास और अधिक मजबूत हो।
अंत में श्री राजपुरोहित ने कहा कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत जनता का विश्वास है।
कुर्सियाँ आती-जाती रहती हैं, लेकिन युवाओं का विश्वास टूट गया तो राष्ट्र का भविष्य कमजोर हो जाएगा। आइए, ऐसी शिक्षा व्यवस्था बनाएं जहाँ हर विद्यार्थी को लगे कि उसकी मेहनत ही उसकी सबसे बड़ी सिफारिश है।



