देश की आवाज़ को डंडे से नहीं, संवाद से सुना जाना चाहिए-सुरेन्द्रसिंह बारवा

जयपुर। नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन को लेकर राजस्थान एनसीपी प्रदेश उपाध्यक्ष (संगठन) एवं किसान नेता सुरेन्द्रसिंह राजपुरोहित बारवा ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जब देश का युवा, किसान, कर्मचारी या कोई भी नागरिक अपनी पीड़ा लेकर सड़क पर उतरने को मजबूर हो जाए तो यह केवल उनका संघर्ष नहीं, बल्कि व्यवस्था के लिए आत्ममंथन का विषय है।
उन्होंने कहा कि हम हर उस पुलिसकर्मी का सम्मान करते है जो ईमानदारी से अपनी वर्दी का मान बढ़ाते है। लेकिन जब कहीं निर्दोष नागरिकों के साथ अन्याय, अपमान या अनावश्यक बल प्रयोग देखने को मिलता है, तो मन व्यथित हो उठता है। वर्दी का सम्मान बना रहना चाहिए, लेकिन न्याय उससे भी ऊपर होना चाहिए।
श्री राजपुरोहित ने कहा कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत जनता का विश्वास है। उस विश्वास को लाठी से नहीं, संवाद से जीता जा सकता है। सरकार और प्रशासन को आंदोलनकारियों की बात संवेदनशीलता के साथ सुननी चाहिए तथा ऐसा समाधान निकालना चाहिए जिससे न्याय भी हो और समाज में विश्वास भी बना रहे।
उन्होंने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि हम राजनीति केवल सत्ता के लिए नहीं, बल्कि उन लोगों की आवाज़ बनने के लिए करते है जिनकी आवाज़ अक्सर अनसुनी रह जाती है। यदि किसी गरीब, किसान, बेरोज़गार, कर्मचारी या आम नागरिक के साथ अन्याय होगा, तो हम उनके साथ खड़े हैं।
अंत में उन्होंने कहा कि हमारा विश्वास है कि न्याय, संवेदना और सत्य की राह कभी आसान नहीं होती, लेकिन यही राह समाज और राष्ट्र को मजबूत बनाती है। आइए, हम नफरत नहीं, न्याय की लड़ाई लड़ें, टकराव नहीं, विश्वास का भारत बनाएं।



