अंडमान निकोबार के दो द्वीपों और समुद्र तट के आकर्षक नजारों ने मन को मोह लिया

–अंडमान निकोबार की 6 दिवसीय यात्रा के रोमांचक तीन दिन
–अंडमान निकोबार यात्रा संस्मरण – (1)
–डाॅ. चन्दर सोनाने
वर्ल्ड आयुष फाउंडेशन और विश्व हिन्दी मंच द्वारा आयोजित अंडमान निकोबार की 6 दिवसीय यात्रा पर हम अपने-अपने राज्यों और शहरों से देशभर के 77 सहयात्री 23 सितम्बर 2024 को दिल्ली पहुंचे थे। हमारी यह यात्रा 5 रात और 6 दिन की थी। दिल्ली एयरपोर्ट पर सबने आपस में परिचय प्राप्त किया और उमंग और उत्साह के साथ केन्द्र शासित प्रदेश अंडमान निकोबार की राजधानी पोर्ट ब्लेयर एयरपोर्ट के लिए निकले। भारत सरकार ने सितंबर 2024 में औपनिवेशिक प्रतीक को बदलते हुए पोर्ट ब्लेयर का नाम बदलकर श्री विजयपुरम कर दिया है। एयरपोर्ट से हम सब होटल पहुंचे और दोपहर का भोजन कर होटल में थोड़ी देर विश्राम किया।
इतिहास, सभ्यता और संस्कृति
हम जब किसी पर्यटन स्थल की यात्रा पर जाते हैं, तो सबसे पहले उस देश और स्थान का इतिहास, सभ्यता और संस्कृति यदि जान लें तो हमारी यात्रा का आनन्द दोगुना हो जाता है। इसलिए चलें सबसे पहले हम अंडमान और निकोबार का इतिहास, सभ्यता और संस्कृति जानते हैं।
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का इतिहास हजारों साल पुराना है और यहाँ की संस्कृति विभिन्न जनजातियों व आधुनिक समुदायों का एक अनूठा मिश्रण है। अंडमान के मूल निवासी नीग्रोइड मूल के हैं जो हजारों साल पहले अफ्रीका से आए थे। जारवा, ओंगे, सेंटिनल और ग्रेट अंडमानजी यहाँ की प्रमुख प्राचीन जनजातियाँ हैं। निकोबार समूह में निकोबारी और शोम्पेन जनजातियाँ निवास करती हैं। मार्को पोलो और कई प्राचीन यात्रियों ने अपने यात्रा वृत्तांतों में इन द्वीपों का जिक्र किया है। माना जाता है कि अंडमान नाम हनुमान जी के नाम से उत्पन्न हुआ है।
18वीं शताब्दी के अंत में अंग्रेजों ने यहाँ अपनी गतिविधियाँ शुरू कीं। पोर्ट ब्लेयर में बनी सेलुलर जेल भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों पर किए गए अत्याचारों की गवाही देती है, जहाँ वीर सावरकर जैसे महान क्रांतिकारियों को काला पानी की सजा दी गई थी। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान इन द्वीपों पर जापान का अधिकार रहा और सुभाष चंद्र बोस ने यहाँ पहली बार आजाद भारत का राष्ट्रीय ध्वज फहराया था। स्वतंत्रता के बाद 1956 में इसे भारत का केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया। अंडमान निकोबार में संयुक्त परिवार की प्रणाली जिसे ट्यूहेत कहा जाता है, बहुत प्रसिद्ध है। आज श्री विजयपुरम, एक आधुनिक और महानगरीय शहर है, जहाँ बंगाली, तमिल, तेलुगु और केरल के लोग आपस में मिलकर शांतिपूर्वक रहते हैं। यहां लोग दुर्गा पूजा, पोंगल, क्रिसमस जैसे सभी प्रमुख त्यौहार मनाते हैं।
संगोष्ठी का आयोजन
शाम को वर्ड्स आयुष फाउंडेशन और विश्व हिंदी मंच के तत्वाधान में होटल के ही सभागृह में एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी का संचालन वर्ड्स आयुष फाउंडेशन के अध्यक्ष डाॅ. रंजन वर्मा विशद ने किया। इस संगोष्ठी में विभिन्न प्रतिभागियों ने अपने-अपने विषय पर सारगर्भित और विद्वतापूर्ण व्याख्यान दिए। संगोष्ठी के अंत में सभी यात्रियों को प्रमाणपत्र भी वितरित किए गए। संगोष्ठी के समापन पर सबने रात्रि भोजन किया और अपने-अपने कक्ष में विश्राम के लिए चले गए।
आकर्षक राॅस आइलैंड
हमारी दूसरे दिन 24 सितम्बर की यात्रा सुबह के नाश्ते के बाद से शुरू हुई। पूरे दिन के दौरान हमें दो द्वीपों राॅस आइलैंड और कोरल आइलैंड के आकर्षक नजारे देखने है। होटल से निकलकर हम सब एक बड़ी नांव में बैठे और राॅस आइलैंड देखने के लिए निकले।
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में स्थित रॉस द्वीप को अब आधिकारिक तौर पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वीप कहा जाता है। यह पोर्ट ब्लेयर से करीब 3 किलोमीटर पूर्व में स्थित एक ऐतिहासिक और खूबसूरत जगह है। साल 2018 में इस रॉस आइलैंड का नाम बदलकर नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वीप रख दिया गया था। आजादी से पहले ब्रिटिश राज के दौरान यहाँ अंडमान का मुख्य प्रशासनिक मुख्यालय हुआ करता था। अपनी शानदार इमारतों और भव्यता के कारण इसे कभी पूरब का पेरिस भी कहा जाता था। आज यहाँ ब्रिटिश काल के पुराने चर्च, चीफ कमिश्नर का बंगला, बॉलरूम और कब्रिस्तानों के खंडहर मौजूद हैं, जिन्हें घने जंगल और पेड़ अपने आगोश में ले रहे हैं। 1941 में आए एक तेज भूकंप और प्राकृतिक आपदा के बाद अंग्रेजों ने यहाँ से अपना मुख्यालय पोर्ट ब्लेयर शिफ्ट कर लिया था। इसे हम सबने देखा और मन भर फोटो खींचे।
नाॅर्थ बे ( कोरल आइलैंड )
राॅस आइलैंड को देखने के बाद हम सब नॉर्थ बे आइलैंड को देखने के लिए निकले। नॉर्थ बे द्वीप, जिसे कोरल आइलैंड भी कहा जाता है। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का एक बेहद लोकप्रिय पर्यटन स्थल है। यह द्वीप अपने खूबसूरत प्रवाल भित्तियों और रोमांचक वॉटर स्पोर्ट्स के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। इस द्वीप पर स्थित ऐतिहासिक लाइटहाउस की तस्वीर भारत के पुराने 20 रूपए के नोट के पीछे छपी हुई है। उथले किनारे और साफ पानी के कारण यह शुरुआती और गैर-तैराकों के लिए पानी के भीतर की दुनिया देखने की सबसे अच्छी जगह है। यहाँ आप स्कूबा डाइविंग, स्नॉर्कलिंग सी वॉक, पैरासेलिंग और ग्लास बॉटम बोट राइड का आनंद ले सकते हैं। जो लोग भीगना नहीं चाहते, वे सेमी-सबमरीन (कोरल सफारी) से भी कोरल देख सकते हैं।
कोरल आइलैंड देखने के लिए हम सब निकले। एक सेमी-सबमरीन में करीब 10 से 12 यात्री बैठकर समुद्र के नीचे तलहटी के पास जाकर वहां का अद्भूत नजारा देखा । इस सेमी-सबमरीन में चारों ओर कांच लगे थे। सेमी-सबमरीन में एक बार में हम 12 यात्री बैठकर नीचे गए। यहां खूबसूरत कोरल , रंग बिरंगी मछलियां और समुद्री जीवन निकट से देखने का शुभ अवसर मिला। हम सबने यह नजारा जीवन में पहली बार देखा था। सब रोमांचित हो उठे। समुद्र के अंदर का अद्भूत नजारा देखने के बाद शाम को हम पोर्ट ब्लेयर की होटल में आ गए। यहां हमने रात्रि भोजन कर रात्रि विश्राम किया।
काॅर्बिन्स कोव बीच
हमारी यात्रा का आज तीसरा दिन था। 25 सितंबर को सुबह नाश्ता कर हमने पोर्ट ब्लेयर का होटल छोड़ दिया और अगली यात्रा के लिए निकले। पोर्ट ब्लेयर हार्बर से फेरी द्वारा हैवलाॅक आइलैंड देखने के लिए निकले। रास्ते में हम सबसे पहले काॅर्बिन्स कोव बीच गए।
काॅर्बिन्स कोव बीच पोर्ट ब्लेयर का सबसे नजदीकी और आसानी से सुलभ होने वाला समुद्र तट है। नारियल के ऊंचे-ऊंचे पेड़ों से घिरा यह अर्धचंद्राकार बीच पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए शाम बिताने और लहरों का आनंद लेने का सबसे पसंदीदा स्थान है। शानदार कोस्टल ड्राइव पोर्ट ब्लेयर के मरीन पार्क से इस बीच तक जाने वाली सड़क बेहद खूबसूरत है। एक तरफ नीला समंदर और दूसरी तरफ हरी-भरी पहाड़ियाँ इस सफर को यादगार बनाती हैं। द्वितीय विश्व युद्ध के समय जापानी सेना द्वारा बनाए गए बंकर इस बीच के रास्ते में और इसके किनारे देखे जा सकते हैं। बीच के ठीक सामने कुछ दूरी पर यह द्वीप स्थित है, जो अपनी बेहतरीन समुद्री प्रजातियों और स्कूबा डाइविंग के लिए जाना जाता है। हम सबने यहां का आकर्षक समुद्र किनारा देखा और उसका भरपूर आनंद लिया। इसे देखने के बाद हम सब यात्री अपने हैवलाॅक आइलैंड के रिसोर्ट में आ गए। यहां हमने रात्रि विश्राम किया। यहां हमें दो रात रुकना है । इस प्रकार हमारी अंडमान निकोबार की 6 दिन की यात्रा में से 3 दिन की यात्रा तीसरे दिन सानंद सम्पन्न हुई। अब आगे हमें 3 दिन की और यात्रा करनी बाकी है ।
(लेखक मध्य प्रदेश शासन के सेवानिवृत्त जनसंपर्क अधिकारी है)



