अंतरराष्ट्रीय

स्वीट्जरलैंड में नाश्ता, लींचस्टीन में लंच और ऑस्ट्रिया में डीनर

यात्रा संस्मरण -(3)

दो देशों ऑस्ट्रिया और लींचस्टीन की यादगार यात्रा


डाॅ. चन्दर सोनाने
फ्रांस में दो दिन और स्वीट्जरलैंड में तीन दिन की यात्रा के बाद 64 यात्रियों का ग्रुप स्वीट्जरलैंड से ऑस्ट्रिया देश के इन्स्ब्रुक के लिए निकला। यह हमारा दिन एक अचरज भरा दिन था। हुआ यूं कि इस एक दिन में हमने तीन देशों की न केवल यात्रा कि बल्कि सुबह का नाश्ता स्वीट्जरलैंड में किया, दोपहर का भोजन दुनिया के सबसे छोटे देश लींचस्टीन के एक गाँव बरूड़ में किया और रात्रि भोज ऑस्ट्रिया के इन्स्ब्रुक में किया। हम सबके लिए यह अद्भूत अनुभव था। बरूड़ एक छोटा सा गाँव था, किन्तु अत्यन्त साफ-सुथरा और अत्यन्त सुंदर था। हमारे यहां जैसी धूल उड़ाती सड़कों की बजाय वहां की सड़कें अत्यन्त साफ-सुथरी थी। ऑस्ट्रिया का इतिहास, सभ्यता और संस्कृति –
यूरोप के मध्य में स्थित ऑस्ट्रिया दुनिया के सबसे समृद्ध, शांत और सांस्कृतिक रूप से धनी देशों में से एक है। इसका इतिहास रोमन साम्राज्य, हैब्सबर्ग राजवंश और महान संगीतकारों की विरासत से जुड़ा हुआ है। ऑस्ट्रिया का इतिहास प्राचीन काल से लेकर आधुनिक लोकतांत्रिक गणराज्य बनने तक बेहद गतिशील रहा है। प्राचीन और रोमन काल ईसा पूर्व चौथी शताब्दी में यहाँ सेल्टिक जनजातियाँ आकर बसीं। पहली शताब्दी ईसा पूर्व में रोमन साम्राज्य ने इस क्षेत्र पर अधिकार कर इसे नोरिकम प्रांत बना दिया। आधुनिक राजधानी वियना कभी रोमन काल की एक सैनिक छावनी थी, जिसे विंडोबोना कहा जाता था। ऑस्ट्रिया के इतिहास का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा हैब्सबर्ग राजवंश का शासन है, जिसने लगभग 650 वर्षों तक मध्य यूरोप पर राज किया। महारानी मारिया थेरेसा और सम्राट फ्रांसिस जोसेफ के समय ऑस्ट्रिया एक वैश्विक महाशक्ति बना।
ऑस्ट्रो-हंगेरियन साम्राज्य और प्रथम विश्व युद्ध साल 1867 में यह ऑस्ट्रो-हंगेरियन साम्राज्य बना। 1914 में ऑस्ट्रिया के आर्कड्यूक फ्रांज फर्डिनेंड की हत्या ही प्रथम विश्व युद्ध का मुख्य कारण बनी। युद्ध में हार के बाद इस विशाल साम्राज्य का पतन हो गया और 1918 में स्वतंत्र ऑस्ट्रिया गणराज्य का जन्म हुआ। नाजी जर्मनी और द्वितीय विश्व युद्ध 1938 में एडॉल्फ हिटलर (जो मूल रूप से ऑस्ट्रियाई था) ने ऑस्ट्रिया का विलय नाजी जर्मनी में कर लिया। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद, 1955 में ऑस्ट्रिया को पूर्ण स्वतंत्रता मिली और उसने खुद को स्थायी रूप से एक तटस्थ देश घोषित कर दिया। ऑस्ट्रिया की सभ्यता, यूरोपीय इतिहास की सबसे विकसित और वैज्ञानिक सभ्यताओं में से एक मानी जाती है हॉलस्टैट संस्कृति ऑस्ट्रिया का हॉलस्टैट क्षेत्र यूरोप में प्रारंभिक लौह युग की सभ्यता का केंद्र माना जाता है। यहाँ ईसा पूर्व 800 शताब्दी की नमक की खदानें और प्राचीन सभ्यता के अवशेष मिले हैं। यहाँ की स्थापत्य कला और सभ्यता बारोक और गोथिक वास्तुकला के शानदार स्मारकों के लिए जानी जाती है। देश ने अब तक चिकित्सा, भौतिकी और अर्थशास्त्र में कई नोबेल पुरस्कार जीते हैं। ऑस्ट्रियाई संस्कृति मुख्य रूप से जर्मन भाषा, ईसाई परंपराओं और कला के प्रति अगाध प्रेम पर आधारित है। ऑस्ट्रिया की आबादी केवल 92 लाख है और इन्स्ब्रुक की आबादी 3.30 लाख है।
दुनिया का सबसे छोटा देश
लींचस्टीन दुनिया का सबसे छोटा देश है। यहां कि आबादी केवल 45 हजार है। हमनें दोपहर का भोजन जहां किया, उस रेस्टोरेंट का मालिक हमारे देश के एक राज्य असम का था। उसने बड़े प्रेम से हम भारतवासियों को लजीज खाना खिलाया। आग्रह कर सुस्वादु आइस्क्रीम भी खिलाई। इस रेस्टोरेंट स्क्लोसल की एक ओर विशेषता थी, होटल के बाहर तिरंगा झंडा लहरा रहा था। यह होटल के मालिक असम निवासी के देशप्रेम का प्रतीक था।
राईन फाल्स
रास्ते में हम सबने एक सुंदर राईन फाल्स देखा। सुंदर वादियों के बीच आकर्षक पानी का झरना सबका मन मोह रहा था। कुछ ने नौका विहार का भी आनंद लिया। इस पानी के झरने के पास खड़े होकर सबने ढेर सारे फोटो खींचे।
सौरोवस्की
सफर के दौरान हमें सौरोवस्की के एक शानदार शो-रूम ले जाया गया। यहां हीरे जवाहरात से बने आकर्षक गहने महिलाओं के आकर्षण का केन्द्र रहे। अनेक ने यहां खरीददारी भी की। शो-रूम के बाहर एक आकर्षक बगीचा भी था। इसमें हरी घास से बने शेर के मुँह से पानी निकल रहा था। यहाँ भी खूब फोटो खींचे गए। हम स्वीट्जरलैंड से सुबह निकले थे और रात्रि में इन्स्ब्रुक पहुंचे और भोजन किया। इसके बाद सबने एक संगोष्ठी में भाग लिया।
अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठी
इन्स्ब्रुक की होटल में जहां हम रूके थे, वहां रात्रि में अन्तर्राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन हुआ। वल्र्ड आयुष फाउंडेशन और विश्व हिंदी मंच द्वारा आयोजित संगोष्ठी में अनेक विद्वानों ने जहां अपने शोधपत्र पढ़े, वहीं कुछ विद्वानों ने विद्ववतापूर्ण व्याख्यान भी पढ़े। संगोष्ठी में डाॅ. एस.डी तिवारी की पुस्तक तेरे नाम के मोती पुस्तक का विमोचन भी किया गया। संगोष्ठी के संयोजन डाॅ. रंजन वर्मा विशद ने संगोष्ठी का सफल संचालन किया। इस प्रकार आयुर्वेद, योग और हिन्दी की त्रिवेणी के साथ अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठी सम्पन्न हुई।
इन्स्ब्रुक में सोने की छत और दुनिया का सबसे पुराना रेस्टोरेंट
इन्स्ब्रुक को आल्प्स पर्वत की राजधानी भी कहते हैं। पर्वतों के बीच बसा यह छोटा सा सुंदर शहर है। इस शहर की स्थापत्य कला के उदाहरण यहां कि शानदार ईमारतें हैं, जो अपनी कहानी खुद कह रही है। एक महल में सोने की छत भी दिखाई दी। इन्स्ब्रुक में ही करीब 650 साल पुराना रेस्टोरंट भी है। इसका नाम गोल्डनर एडलर है। यह दुनिया का सबसे पुराना रेस्टोरेंट है। यह 1390 में बनाया गया था। आश्चर्य की बात यह है कि यह आज भी चालू हालत में है। हमने भी इस भव्य रेस्टोरेंट को देखा और स्थापत्य कला की सराहना की।
इस प्रकार ऑस्ट्रिया देश के इन्स्ब्रुक में हमने एक शानदार और यादगार दिन बिताया। इसके साथ ही दुनिया के सबसे छोटे देश लींचस्टीन में रूककर दोपहर के भोजन का आनंद भी लिया। और इन्स्ब्रुक में रात्रि में अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठी में सबने उमंग-उत्साह के साथ भाग लिया। (लेखक मध्य प्रदेश जनसंपर्क विभाग की सेवानिवृत्ति जनसंपर्क अधिकारी हैं)

राजेंद्र पुरोहित

वरिष्ठ पत्रकार एवं Editor-in-Chief राजेंद्र पुरोहित पत्रकारिता के क्षेत्र में 40 से अधिक वर्षों का अनुभव रखने वाले वरिष्ठ पत्रकार हैं। उन्होंने नईदुनिया, जागरण, अग्निबाण, सिटी चैनल और साधना न्यूज़ सहित प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में कार्य किया है। मध्य प्रदेश के अधिमान्य पत्रकार राजेंद्र पुरोहित लोक वर्चस्व समाचार पत्र एवं lokvarchasva.in के संस्थापक और Editor-in-Chief हैं।

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