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CBSE OSM सिस्टम विवाद: शिक्षा मंत्रालय ने शुरू की उच्च स्तरीय जांच

कई बड़े अधिकारियों पर गिरेगी गाज

नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा साल 2026 की बोर्ड परीक्षाओं में लागू किए गए ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम को लेकर उपजा विवाद अब गंभीर रूप ले चुका है। शिक्षा मंत्रालय ने इस नई डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली में सामने आई तकनीकी खामियों और टेंडर आवंटन प्रक्रिया में कथित भारी अनियमितताओं को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाते हुए आंतरिक जांच शुरू कर दी है।

मंत्रालय के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, इस पूरे मामले में सीबीएसई की ओर से अब तक दिए गए जवाब पूरी तरह से असंतोषजनक पाए गए हैं। इसके बाद अब बोर्ड के भीतर कई स्तरों पर बैठे जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और उन पर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई करने की पूरी रूपरेखा तैयार कर ली गई है। लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़े इस संवेदनशील मामले में सरकार किसी भी तरह की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है।

हैदराबाद की ‘कोएम्प्ट एडु टेक’ को टेंडर देने की प्रक्रिया संदेह के घेरे में

इस पूरे विवाद की जड़ें OSM सिस्टम के लिए निकाले गए टेंडर से जुड़ी हुई हैं। शिक्षा मंत्रालय ने हैदराबाद स्थित ‘कोएम्प्ट एडु टेक’ नामक कंपनी को यह अहम ठेका दिए जाने की विस्तृत रिपोर्ट बोर्ड से तलब की है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, सीबीएसई को इस डिजिटल सिस्टम को लागू करने के लिए तीन बार टेंडर जारी करने पड़े थे।

शुरुआती दो प्रयासों में तकनीकी मानकों पर कोई भी योग्य कंपनी नहीं मिल सकी थी, जिसके बाद तीसरे टेंडर की शर्तों में कई अहम बदलाव किए गए। आरोप हैं कि कोएम्प्ट को सफल बोलीदाता घोषित करने के लिए टेंडर प्रक्रिया के विभिन्न चरणों में योग्यता और तकनीकी मापदंडों में मनमाने तरीके से बदलाव किए गए।

विपक्षी नेताओं ने भी आरोप लगाया था कि इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य एक विशेष कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाना था। हालांकि, सीबीएसई ने शुरुआत में इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बताया था, लेकिन अब मंत्रालय इसे महज एक तकनीकी नाकामी नहीं, बल्कि सिस्टम के भीतर की गहरी और सुनियोजित चूक मान रहा है।

छात्रों की कॉपियों के मूल्यांकन और स्कैनिंग में भारी गड़बड़ियां

सीबीएसई ने 2026 की बोर्ड परीक्षाओं में उत्तर पुस्तिकाओं के तेज और त्रुटिहीन मूल्यांकन के उद्देश्य से पहली बार ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम की शुरुआत की थी। इसके तहत छात्रों की कॉपियों को स्कैन करके डिजिटल माध्यम से जांचा जाना था। लेकिन, परिणाम आने के बाद जब छात्रों ने री-इवैल्यूएशन (पुनर्मूल्यांकन) पोर्टल का रुख किया, तो कई चौंकाने वाली गड़बड़ियां सामने आईं।

छात्रों ने शिकायत की है कि उन्हें पोर्टल पर अपनी आंसर शीट बेहद धुंधली दिखाई दे रही है, कई कॉपियों से महत्वपूर्ण पन्ने पूरी तरह गायब हैं, और कुछ मामलों में तो स्कैन की गई कॉपी का उनके मूल विषय से ही मिसमैच हो रहा है। री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया के दौरान पोर्टल पर बार-बार तकनीकी दिक्कतें आने से छात्रों का तनाव और बढ़ गया।

विभागीय आंकड़ों के अनुसार, OSM सिस्टम के शुरुआती उपयोग के दौरान ही लगभग 20 ऐसे मामले सामने आए जहां उत्तर पुस्तिकाओं के पूरी तरह से मिक्स-अप होने की पुष्टि हुई। स्कैनिंग की बेहद खराब गुणवत्ता के चलते बोर्ड को अंततः 13,000 से अधिक कॉपियों का मूल्यांकन वापस पारंपरिक (मैन्युअल) तरीके से करने पर मजबूर होना पड़ा।

पोर्टल की साइबर सुरक्षा खामियां दूर करने के लिए IIT विशेषज्ञों की तैनाती

मूल्यांकन की गड़बड़ियों के अलावा, साइबर सुरक्षा के मोर्चे पर भी यह सिस्टम पूरी तरह से कमजोर साबित हुआ है।

एथिकल हैकर्स और साइबर सुरक्षा शोधकर्ताओं ने हाल ही में सीबीएसई के इस नए डिजिटल इवैल्यूएशन इंफ्रास्ट्रक्चर की कई गंभीर कमजोरियों को सार्वजनिक रूप से उजागर किया है।

मंत्रालय के अधिकारियों का मानना है कि यह स्थिति इसलिए भी ज्यादा चिंताजनक है क्योंकि इतने बड़े राष्ट्रीय स्तर के बोर्ड के पास अभी भी करोड़ों छात्रों की आंसर शीट और उनके परीक्षा रिकॉर्ड को सुरक्षित रूप से सहेजने के लिए कोई सुव्यवस्थित ‘डिजिटल रिपॉजिटरी आर्किटेक्चर’ मौजूद नहीं है।

लगातार बढ़ती आलोचनाओं और डेटा ब्रीच के खतरे को देखते हुए शिक्षा मंत्रालय ने अब डैमेज कंट्रोल के लिए देश के प्रतिष्ठित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) के साइबर विशेषज्ञों की टीम को काम पर लगाया है।

यह विशेषज्ञ टीम अब री-इवैल्यूएशन पोर्टल के पूरे डिजिटल आर्किटेक्चर का गहराई से ऑडिट करेगी और भविष्य में किसी भी तरह के साइबर हमले से बचने के लिए इसकी सुरक्षा को मजबूत बनाने का जिम्मा संभालेगी।

शिक्षा मंत्री द्वारा विसंगतियां स्वीकार करने के बाद सख्त कार्रवाई का भरोसा

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इस पूरे प्रकरण पर मचे बवाल के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को खुद सामने आना पड़ा। उन्होंने सार्वजनिक रूप से इस बात को स्वीकार किया है कि नई OSM प्रणाली को लागू करने में कई तरह की विसंगतियां और प्रशासनिक खामियां सामने आई हैं।

शिक्षा मंत्री ने छात्रों और उनके अभिभावकों को स्पष्ट रूप से आश्वस्त किया है कि किसी भी छात्र के भविष्य के साथ कोई खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा। छात्रों द्वारा दर्ज कराई गई हर एक शिकायत की गंभीरता से जांच होगी।

इसके साथ ही, उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि इस पूरी मूल्यांकन प्रणाली में जिन भी लोगों की लापरवाही सामने आएगी, उनके खिलाफ बिना किसी नरमी के सख्त कानूनी और विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

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