उज्जैन: काम में सुस्ती पड़ी भारी, हरिफाटक ओवरब्रिज निर्माण एजेंसी पर लगा 5 लाख का जुर्माना
सिंहस्थ 2028: संभागायुक्त ने निर्माण की धीमी रफ्तार पर नाराजगी जाहिर की

उज्जैन: सिंहस्थ 2028 की तैयारियों को लेकर उज्जैन प्रशासन अब सख्त रुख अपना चुका है। विकास कार्यों में लापरवाही और धीमी गति किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसी क्रम में, सोमवार को हरिफाटक रेलवे ओवरब्रिज (ROB) के निरीक्षण के दौरान संभागायुक्त सह सिंहस्थ मेला अधिकारी श्री आशीष सिंह ने कार्य में देरी करने वाली निर्माण एजेंसी पर 5 लाख रुपये का जुर्माना (पेनल्टी) ठोक दिया है।
निर्माण एजेंसी को सख्त चेतावनी: काम की गति बढ़ाएं, वरना होगी और बड़ी कार्रवाई
निरीक्षण के दौरान संभागायुक्त श्री सिंह ने हरिफाटक आरओबी निर्माण कार्य की धीमी रफ्तार पर गहरी नाराजगी जाहिर की। उन्हें जानकारी दी गई कि ब्रिज निर्माण के लिए अब तक मात्र 21 पाइल का कार्य ही पूरा हो पाया है। इस सुस्ती पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने राजस्थान की निर्माण एजेंसी ‘रवि इंफ्राविल्ड प्रोजेक्ट लिमिटेड’ पर 5 लाख रुपये की पेनल्टी लगाने के निर्देश दिए।
संभागायुक्त ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि एजेंसी ने तुरंत मशीनें बढ़ाकर कार्य की गति में अपेक्षित प्रगति नहीं दिखाई, तो भविष्य में और भी कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
बारिश से पहले फाउंडेशन कार्य पूरा करने के निर्देश
सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखते हुए इस प्रोजेक्ट को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। संभागायुक्त ने निर्माण एजेंसी को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि ब्रिज का समस्त ‘फाउंडेशन कार्य’ मानसून की दस्तक से पूर्व हर हाल में पूरा किया जाए। इसके साथ ही, मार्ग के निर्माण में आ रही बाधाओं को हटाने के लिए उन्होंने नगर निगम प्रशासन को भी तत्काल प्रभाव से नगर निगम की संरचनाओं को खाली कराने के आदेश दिए हैं।
सिंहस्थ बायपास और गुणवत्ता पर खास जोर
हरिफाटक आरओबी के अलावा, संभागायुक्त ने सिंहस्थ बायपास 4-लेन मार्ग का भी सघन निरीक्षण किया। शिप्रा नदी पर बन रहे नए ब्रिज के शेष पाइल कार्य को 10 जून तक पूरा करने का लक्ष्य दिया गया है।
निरीक्षण के मुख्य बिंदु:
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गुणवत्ता से समझौता नहीं: निर्माण कार्य में उपयोग की जा रही सामग्री की नियमित गुणवत्ता जांच करने के निर्देश दिए गए हैं।
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मानकों का पालन: विभागीय इंजीनियरों और कंसल्टेंट्स को हिदायत दी गई है कि कार्य में उच्च मानक वाली सामग्री ही इस्तेमाल की जाए।
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समय-सीमा का ध्यान: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशों का हवाला देते हुए कहा गया कि सिंहस्थ से जुड़ी ये परियोजनाएं बेहद महत्वपूर्ण हैं, जिन्हें तय समय-सीमा के भीतर ही पूर्ण करना अनिवार्य है।
उज्जैन प्रशासन का यह सख्त कदम अन्य निर्माण एजेंसियों के लिए भी एक बड़ा संदेश है कि सिंहस्थ जैसे महाकुंभ की तैयारियों में किसी भी स्तर पर कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अब देखना यह है कि जुर्माना लगने के बाद निर्माण कार्य में कितनी तेजी आती है।



