क्षिप्रा तट पर मनेगी वीर दुर्गादास राठौड़ की 388वीं जयंती

-जोधपुर राजवंश के प्रतिनिधि भी होंगे शामिल, 56 करोड़ से संवर रहा समाधि स्थल, पर्यटन केंद्र के रूप में मिलेगी नई पहचान
उज्जैन। क्षत्रिय वीर शिरोमणि दुर्गादास राठौड़ की 388वीं जयंती 13 अगस्त को मनाई जाएगी। इस अवसर पर स्थानीय क्षिप्रा तट स्थित उनके ऐतिहासिक समाधि स्थल पर समग्र राजपूत सरदारों और क्षत्राणियों द्वारा पुष्पांजलि अर्पित की जाएगी। कार्यक्रम में जोधपुर राजवंश के प्रतिनिधि और अनेक क्षत्राणी संगठन भी विशेष रूप से शामिल होंगे।वीर दुर्गादास राठौड़ स्मृति समिति उज्जैन के संयोजक भरत सिंह हाड़ा ने बताया कि भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय और मध्य प्रदेश शासन के सहयोग से इस ऐतिहासिक स्मारक के वृहद विकास के लिए 56 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। वर्तमान में यहां तेजी से निर्माण कार्य जारी है। जल्द ही यह स्थल उज्जैन के एक प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में पहचाना जाएगा।
वीर दुर्गादास राठौड़ स्मृति समिति उज्जैन के संयोजक भरत सिंह हाड़ा ने बताया कि भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय और मध्य प्रदेश शासन के सहयोग से इस ऐतिहासिक स्मारक के वृहद विकास के लिए 56 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। वर्तमान में यहां तेजी से निर्माण कार्य जारी है। जल्द ही यह स्थल उज्जैन के एक प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में पहचाना जाएगा।
मुगलों का किया था डटकर मुकाबला
वीर दुर्गादास राठौड़ जोधपुर मारवाड़ राजवंश के प्रमुख सेनापति थे। उन्होंने मारवाड़ और सीमावर्ती रियासतों पर मुगलों तथा आततायियों के आक्रमणों का डटकर मुकाबला किया और क्षेत्र की रक्षा के लिए कई युद्ध लड़कर विद्रोहियों को खदेड़ा। जीवन के अंतिम समय में 86 वर्ष की अवस्था में क्षिप्रा तट पर ही उनका निधन हुआ था। मरणोपरांत जोधपुर राजवंश द्वारा उनकी समाधि बनवाई गई थी, जो वर्तमान में पुरातत्व विभाग के संरक्षण में है।



