पारस जैन तो पारस ही थे-अब उनकी यादें शेष है…

(राजेंद्र पुरोहित)
उज्जैन। उज्जैन की राजनीतिक क्षितिज को छूने वाले श्री पारस जैन हमारे बीच नहीं रहे…. उनके सद व्यवहार, मिलन सारिता ने उनकी लोकप्रियता को बढ़ाया है… वे अंतिम समय तक जन सामान्य की तरह सदैव लोगों के बीच रहे हैं… उन्हें यह कभी गुमान नहीं था कि वे मंत्री, विधायक है… वह हर कार्यकर्ता से मुस्कुराते हुए बातें करते थे, उनकी सुनते थे…. वह हर किसी के दुख में भागीदार होकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराते रहे…. वे निश्चित रूप से जन सामान्य के नेता थे.. वैसे मानव गुण और अवगुणों का पुतला होता है… फिर भी पारस जी तो पारस है, पत्थर नहीं… जीवन और राजनीतिक उतार-चढ़ाव परिवर्तन की एक प्रक्रिया होती है और उससे हर व्यक्ति को गुजरना होता है… अंततः वे मुस्कुराते हुए चल दिए… हम श्री पारस जी को अंतर्मन की गहराइयों से आदरांजलि, विनम्रांजलि और श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं…
उज्जैन की राजनीति का एक सशक्त और अनुभवी चेहरा
पारस चंद्र जैन मध्य प्रदेश की राजनीति के वरिष्ठ नेताओं में शामिल रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी के समर्पित कार्यकर्ता से लेकर कैबिनेट मंत्री बनने तक का उनका राजनीतिक सफर लगभग चार दशकों से अधिक समय में जनसेवा, संगठन और प्रशासनिक अनुभव का उदाहरण माना जाता है। वे लंबे समय तक उज्जैन उत्तर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते रहे और मालवा अंचल में भाजपा के प्रमुख नेताओं में उनकी पहचान रही है।
20 जून 1950 को उज्जैन में जन्मे पारस जैन ने विक्रम विश्वविद्यालय से बी.कॉम. की शिक्षा प्राप्त की। छात्र जीवन से ही वे सामाजिक और सार्वजनिक गतिविधियों में सक्रिय रहे। प्रारंभिक दौर में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े तथा बाद में भारतीय जनता पार्टी के संगठन में सक्रिय भूमिका निभाई।
वर्ष 1990 में उन्होंने पहली बार उज्जैन उत्तर विधानसभा क्षेत्र से विधायक का चुनाव जीता। इसके बाद 1993, 2003, 2008, 2013 और 2018 में भी जनता ने उन पर विश्वास जताया। 1998 में उन्हें चुनावी पराजय का सामना करना पड़ा, लेकिन 2003 में उन्होंने पुनः विजय प्राप्त कर राजनीतिक वापसी की और लगातार क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया।
मध्य प्रदेश सरकार में उन्होंने अनेक महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाली। वे वन विभाग, स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग में राज्य मंत्री रहे। बाद में उन्हें स्कूल शिक्षा विभाग का कैबिनेट मंत्री बनाया गया तथा वर्ष 2016 में ऊर्जा एवं नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग का कैबिनेट मंत्री नियुक्त किया गया। उनके कार्यकाल में ऊर्जा क्षेत्र और प्रशासनिक सुधारों से जुड़े कई निर्णय लिए गए।
पारस जैन का राजनीतिक जीवन केवल चुनावी राजनीति तक सीमित नहीं रहा। वे सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों से भी निरंतर जुड़े रहे हैं। उज्जैन सिंहस्थ महापर्व की तैयारियों और व्यवस्थाओं में भी उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई। सरल व्यवहार, संगठन के प्रति निष्ठा और कार्यकर्ताओं से सतत संवाद उनकी कार्यशैली की विशेषता मानी जाती है।
मालवा क्षेत्र में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं में उनकी अलग पहचान रही है। संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर उन्होंने महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाईं और विकास कार्यों के माध्यम से उज्जैन के आधारभूत ढांचे, शिक्षा तथा नागरिक सुविधाओं के विस्तार में योगदान दिया।
वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उज्जैन उत्तर से नया प्रत्याशी उतारा। इसके बावजूद पारस जैन का नाम आज भी उज्जैन की राजनीति के अनुभवी, वरिष्ठ और प्रभावशाली नेताओं में सम्मान के साथ लिया जाता है। उनका राजनीतिक जीवन जनसेवा, संगठन के प्रति समर्पण और दीर्घकालीन सार्वजनिक जीवन का महत्वपूर्ण अध्याय माना जाता है।



