उज्जैनदेशप्रदेश

सिंहस्‍थ 2016 में सेवाएं दे चुके वरिष्‍ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने अपने अनुभव साझा किए

प्रशासन द्वारा सिंहस्‍थ 2016 के अनुभव और सिंहस्‍थ 2028 के संकल्प पर कार्यशाला का आयोजन किया गया

सिंहस्‍थ 2028 सभी दृष्टिकोंण से सुविधाजनक और श्रेष्‍ठ प्रबंधन का उदाहरण बनेगा

सिंहस्‍थ 2028 के लिए व्‍यवस्‍थाओं के संबंध में महत्‍वपूर्ण सुझाव दिए गए

उज्‍जैन 27 जून। आगामी सिंहस्‍थ महापर्व को ध्‍यान में रखते हुए प्रशासन द्वारा आज शनिवार को सिंहस्‍थ 2016 के अनुभव और सिंहस्‍थ 2028 का संकल्‍प पर आधारीत कार्यशाला का आयोजन किया गया । मुख्‍यमंत्री डॉ यादव द्वारा कार्यशाला का शुभारंभ किया गया। कार्यशाला में विगत सिंहस्‍थ 2016 में अपनी सेवाएं दे चुके वरिष्‍ठ प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा अपने अनुभव साझा किए गए तथा आगामी सिंहस्‍थ 2028 महापर्व के अंतर्गत की जाने वाली व्‍यवस्‍थाओं के संबंध में महत्‍पूर्ण सुझाव दिए गए।
संभागायुक्‍त एवं मेला अधिकारी श्री आशीष सिंह द्वारा सभी का स्‍वागत किया गया और कार्यशाला के उद्देश्‍य के बारे में जानकारी दी गई साथ ही सिंहस्‍थ 2028 के अंतर्गत चल रहे निर्माण कार्यों के बारे मे विस्तार से बताया गया।
इसके पश्‍चात ज्ञान साझाकरण सत्र में सिंहस्‍थ 2016 में संभागायुक्‍त उज्‍जैन रहे डॉ. रवींद्र पस्‍तोर ने कहा कि आगामी सिंहस्‍थ को ध्‍यान में रखते हुए सभी अधिकारियों व कर्मचारियों को सबसे पहले इवेंट मैनेजमेंट सीखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि सिंहस्थ-2028 की व्यवस्था में शामिल रहने वाले पुलिस, प्रशासन और अन्य विभाग के अधिकारी पहले सिंहस्थ के लिए खुद को तैयार करें। उज्जैन के इतिहास, परंपरा, भौगोलिक स्थिति के साथ विगत सिंहस्थ के आयोजन को अध्ययन करें।
डॉ. पस्तोर ने सुझाव दिया कि अधिकारी स्टेंडअप मीटिंग प्रारंभ करें। जहां सिंहस्‍थ के कार्य हो रहे है या होने हैं, वहीं उपस्थित होकर अधिकारियों से चर्चा करें और सुझाव भी लें। फील्ड पर उपस्थित होकर हर व्यक्ति से अनुभव के आधार पर सुझाव लेकर बेहतर प्लानिंग की जा सकती है। उन्होने कहा कि व्यवस्था में लगे सभी विभागों के अधिकारी (प्री- एक्सरसाइज) कर कार्य की पूर्व सफलता अथवा असफलता का अनुमान लगाएं। एक कार्य योजना असफल होती है तो प्‍लान बी बना उस पर कार्य करें। हर विभाग के पास चार प्लान होना चाहिए, एक फेल हुआ तो दूसरे प्लान की तैयारी रखें। उन्होने कहा कि सिंहस्थ क्षेत्र के प्रत्येक सेक्टर में जरूरत की आवश्यक सामग्री की व्यवस्था होना चाहिए। जिससे सिंहस्थ के आयोजन के दौरान अधिक भीड़ होने और वाहनों की आवाजाही नहीं हो पाने की स्थिति में आवश्यक साम्रगी की पूर्ति हो सके।
हर अखाड़े की अपनी परंपरा, उन्हें समझें
डॉ. पस्‍तोर ने कहा कि सिंहस्थ के आयोजन में सबसे प्रमुख अखाड़े ही होते हैं। हर अखाड़े की अपनी परंपरा होती है। अधिकारी पहले अखाड़े की परंपरा को समझें तभी वे अखाड़ों के साधु-संतो से संवाद कर सकेंगे। उन्होने कहा कि सिंहस्थ के कार्यो में हर अधिकारी को पारदर्शिता का रवैया अपनाना चाहिए। आस्‍था के महापर्व सिंहस्‍थ को श्रद्धा के साथ सम्‍पन करवाना हम सब की जिम्‍मेदारी है। अधिकारी स्वयं की तैयारी करते हुए सिंहस्थ की तैयारी का भी अध्ययन करें। सिंहस्थ-2016 में 5 से 7 करोड़ श्रद्धालुओं की व्यवस्था की गई थी। अब सिंहस्थ-2028 का आयोजन बहुत बड़े स्तर पर होना है। इस आयोजन में 45 करोड़ श्रद्धालुओं का आगमन होने का अनुमान है। इसलिए प्रत्येक अधिकारी को सिंहस्थ का इतिहास, परंपरा, अखाड़ों की गतिविधियां जानना जरूरी है।

शिप्रा नदी पर निर्मित नए घाटों को धार्मिक मान्यता और प्राचीनता के आधार पर प्रचारित करें

कार्यशाला में सिंहस्थ-2016 में कलेक्टर रहे श्री कवींद्र कियावत ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि पूर्व सिंहस्थ से बहुत कुछ सीखा जा सकता है। 2028 के सिंहस्थ में श्रद्धालुओं की संख्या को लेकर काफी चुनौतियां है। सिंहस्थ-2028 के लिए 29 किलोमीटर के नवीन घाट तैयार होने के बाद इन घाटों का नामकरण, प्राचीनता और धार्मिक मान्यता के आधार पर किया जाए। घाट पर पौराणिक वर्णन भी किया जाए जिससे श्रद्धालुओं को घाट के महत्व की जानकारी भी मिल सके। इससे एक ही घाट पर भीड़ का दबाव कम होगा।
यातायात व्यवस्था को लेकर श्री कियावत ने सुझाव दिया कि प्रमुख मार्गो पर होटल संचालकों को पार्किंग की उचित व्यवस्था करने की हिदायत दें। ताकी सड़क पर अतिक्रमण ना हो और मार्ग अवरूद्ध ना हो ।
अखाड़ों में समन्वय अधिकारियों को नियुक्त करें जिससे साधु-संतों से संवाद बना रहे
श्री कियावत ने साधु-संतों को प्लाट आवंटन के संबंध में सुझाव देते हुए कहा कि परंपरागत अखाड़ों के स्थान निर्धारित हैं। इसके अलावा अन्य बड़े प्रवचनकारों को आउटर पर प्लाट आवंटन किया जाए, जिससे प्रवचनकारों के पंडाल में अधिक भीड़ होने से मेला क्षेत्र की व्यवस्था प्रभावित न हो। होम स्टे को लेकर श्री कियावत ने कहा कि सिंहस्‍थ में श्रद्धालुओं की अधिक भीड़ को ध्‍यान में रखते हुए सभी होम स्टे की मजबूती, फायर सैफ्टी, निर्गम मार्ग की व्यवस्था और अन्‍य सुरक्षा के पहलुओं को बारिकी से देखना जरूरी है। उन्होने कहा कि प्रत्येक अखाड़े में एक समन्वय अधिकारी की नियुक्ति की जाए, जिससे किसी भी समस्या के निराकरण के लिए साधु-संतो से निरंतर संवाद चलता रहे।

श्री कियावत ने कहा कि भीड़ मैनेजमेंट के लिए जरूरी है कि इस बार सिंहस्थ के दौरान प्रयागराज कुंभ की तरह ही एक निश्चित दूरी पर वाहनों को रोक कर श्रद्धालुओं को पैदल घाट तक पहुंचाया जाए। आवश्यक वाहनों के आने-जाने के लिए एक मार्ग निर्धारित हो, उस मार्ग पर केवल जरूरी आवश्यक वाहन का संचालन हो । उन्होंने कहा कि घाट पर बच्चे, युवा और बुजुर्गों के स्नान करने के समय का निर्धारण कर व्यवस्थाएं की जाए। जिससे एक समय में अधिक से अधिक श्रद्धालुओं को स्नान कराने की स्थिति सामने आ सके। बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को सुविधा पूर्वक स्नान कराने के बाद गंतव्य की ओर रवाना किया जा सके।
सिंहस्‍थ 2016 में पुलिस अधीक्षक रहें श्री मनोहर सिंह वर्मा ने कहा कि सिंहस्‍थ महापर्व का आयोजन बहुत वृहद स्‍तर पर होता है । आयोजन के दौरान हमें लगातार सिखते रहने को मिलता है।

सिंहस्‍थ में मुख्‍य रूप से सभी व्‍यवस्‍थाएं प्रमुख अखाड़ो को ध्‍यान में रखकर की जाना चाहिए । इसके पश्‍चात सिंहस्‍थ में आने वाले श्रद्धालुओं को सभी मुलभुत सुविधाएं सुनिश्‍चित करना चाहिए। सिंहस्‍थ में पार्किंग स्‍थल का विशेष ध्‍यान रखा जाए, यहां पर मुलभुत सुविधाएं उपलबध करवाई जाए तथा पार्किंग स्‍थलों पर बड़ी एलईडी स्किन भी लगाई जाए । ताकी बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं मेला क्षेत्र का प्रसारण देख सके।
बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए विभिन्‍न स्‍थनों पर दिशा सुचक चिन्‍ह लगाएं जाएं पार्किंग स्‍थल से लागों को लाने ले जाने के लिए पब्लिक ट्रांसर्पाट की व्‍यवस्‍था सुचारू रूप से संचालित कि जाए। ट्राफिक प्रबंधन की कार्ययोजना अच्‍छे से बनाई जाएं तथा ड्यूटी पर तैनात सभी पुलिस अधिकारीयों और कर्मचारीयों को इससे समय समय पर अवगत कराया जाएं। सभी श्रद्धालुओं से अच्‍छा व्‍यवहार करें ताकी वे यहां से लोटते समय एक अच्‍छी स्‍मृति ले कर जाए ।
कार्यशाला में सिंहस्‍थ के अंतर्गत बनाए गए विभिन्‍न झोन के झोनल अधिकारीयों द्वारा विगत 2016 के अनुभव साझा किए गए। इसके पश्‍चात विभिन्‍न विभागों के अधिकारीयों द्वारा भी अपने अनुभव साझा किए गए।
उल्‍लेखनीय है की उक्‍त अनुसंशाओं का समेकन और प्रमुख निष्‍कर्षों का संकलन कर सिंहस्‍थ 2028 के लिए रणनीतिक रोडमैप तैयार किया जाएगा साथ ही अतीत के अनुभवों से सीखते हुए, आगामी सिंहस्‍थ 2028 के सफल आयोजन के लिए रणनीतिक दिशा निधारण भी किया जाएगा।
कार्यशाला में एडीजी श्री राकेश गुप्ता, डीआईजी श्री नवनीत भसीन, कलेक्टर श्री रौशन कुमार सिंह, एसपी श्री प्रदीप शर्मा, एडीएम अत्येंद्र सिंह गुर्जर, प्रशासक श्री महाकालेश्‍वर मंदिर प्रबंध समिति श्री प्रथम कौशिक,सीईओ जिला पंचायत श्री श्रेयांस कुमट, नगर निगम आयुक्‍त श्री अभिलाष मिश्रा, अपर कलेक्‍टर श्री शाश्‍वत शर्मा, यूडीए सीईओ श्री संदीप सोनी,एमपीआईडीसी के क्षेत्रिय निदेशक श्री राजेश राठौर एवं अन्‍य समस्‍त विभागों के अधिकारिगण तथा पूर्व में उज्जैन में पदस्थ रहे वरिष्ठ प्रशानिक अधिकारी श्री नरेंद्र सूर्यवंशी, श्री अवधेश शर्मा, श्री गोपाल डाड, महाकाल मंदिर समिति के पूर्व प्रशासक श्री जयंत जोशी, श्री आरपी तिवारी, श्री सौजानसिंह रावत, श्री नीरज वशिष्ठ, श्री रोहन सक्सेना एवं अन्‍य अधिकारी उपस्थित रहे।

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