उज्जैन

उज्जैन: रीवा घटना के विरोध में सड़कों पर उतरा जैन समाज, ‘राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति’ की मांग को लेकर निकाली मौन रैली

उज्जैन: रीवा में जैन साध्वियों के साथ हुई हालिया घटना के विरोध में सोमवार को उज्जैन का सकल जैन समाज सड़कों पर उतर आया। संतों के अपमान और सुरक्षा में चूक के खिलाफ शहर में एक विशाल मौन रैली का आयोजन किया गया। समाज के हजारों लोगों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध दर्ज कराते हुए केंद्र सरकार से अविलंब ‘राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति’ लागू करने की मांग की है।

फ्रीगंज से घंटाघर तक निकला मौन जुलूस

यह रैली फ्रीगंज स्थित श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन पंचायती मंदिर से शुरू हुई। इस दौरान किसी भी तरह की नारेबाजी के बजाय समाजजनों ने मौन रहकर अपनी गरिमापूर्ण उपस्थिति दर्ज कराई। रैली में शामिल लोग अपने हाथों में तख्तियां और बैनर लिए हुए थे, जिन पर संतों की सुरक्षा और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग लिखी थी।

रैली का नेतृत्व पूज्य आचार्य डॉ. मुक्तिसागरसूरिजी महाराज, पूज्य डॉ. संयमरत्नविजयजी महाराज और पूज्य आर्यिका ज्ञेयमतिमाताजी संसघ के सानिध्य में किया गया। पुरुष वर्ग सफेद वस्त्रों में और महिलाएं केशरिया परिधान में अनुशासित कतारों में चलते हुए घंटाघर पहुंचीं।

कलेक्टर को सौंपा प्रधानमंत्री और गृहमंत्री के नाम ज्ञापन

रैली का समापन घंटाघर पर हुआ, जहां समाज के प्रतिनिधिमंडल ने उज्जैन कलेक्टर को प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृहमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा। समाज के पदाधिकारी दीपक जैन ने बताया कि रीवा की घटना ने न केवल जैन समाज बल्कि पूरे देश के धार्मिक मूल्यों को आहत किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक संतों के लिए सुरक्षा का ठोस कानूनी ढांचा नहीं बनता, तब तक समाज का यह आक्रोश जारी रहेगा।

क्यों जरूरी है राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति?

जैन समाज ने सरकार से निम्नलिखित प्रमुख मांगें की हैं:

  • उच्च स्तरीय जांच: रीवा मामले में संलिप्त दोषियों के विरुद्ध फास्ट-ट्रैक कोर्ट में मुकदमा चलाया जाए।

  • सुरक्षा कानून: देशभर में साधु-संतों, साध्वियों और आर्यिकाओं की सुरक्षा के लिए ‘राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति’ को कानून का स्वरूप दिया जाए।

  • सख्त कानून व्यवस्था: धार्मिक यात्राओं और विहार के दौरान संतों को पर्याप्त सुरक्षा कवच प्रदान किया जाए।

उज्जैन में आयोजित इस रैली ने एक बार फिर देश में संतों की सुरक्षा के विषय को प्रमुखता से उठा दिया है। प्रशासन ने ज्ञापन लेने के बाद उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

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