चौंकाने वाले खुलासे, पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं में भी तंबाकू सेवन की भारी लत


उज्जैन 31 मई। जिले के ग्राम लांबीखेड़ी में ग्रामीणों के बीच किए गए एक ग्रामीण स्वास्थ्य सर्वेक्षण में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। सर्वेक्षण में यह पाया गया है कि गांव के लगभग 70 प्रतिशत लोग किसी न किसी रूप में तंबाकू या उससे जुड़े उत्पादों का सेवन कर रहे हैं। यह व्यापक सर्वेक्षण आर. डी. गार्डी मेडिकल कॉलेज के सामुदायिक चिकित्सा विभाग द्वारा प्रसिद्ध कैंसर विशेषज्ञ डॉ. दिनेश पेंढारकर के सहयोग से किया गया। इस पहल का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण समुदाय में तंबाकू सेवन की स्थिति और इससे जुड़े गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों का सटीक आकलन करना था।
सर्वेक्षण में गांव के कुल 443 ग्रामीणों ने भाग लिया, जिनकी औसत आयु लगभग 40 वर्ष थी। अध्ययन के दौरान 443 में से 308 उत्तरदाता तंबाकू उत्पादों का उपयोग करते पाए गए। आंकड़ों के अनुसार, कुल लोगों में से सर्वाधिक 63.0 प्रतिशत ग्रामीण तंबाकू चबाने के आदी हैं। इसके अलावा 30.9 प्रतिशत बीड़ी और 9.9 प्रतिशत सिगरेट पीते हैं, वहीं 25.1 प्रतिशत लोग सुपारी और 19.4 प्रतिशत पान मसाला का सेवन करते पाए गए। लिंग आधारित विश्लेषण से यह भी सामने आया कि नशे की यह लत समुदाय के दोनों वर्गों में गहराई तक मौजूद है। अध्ययन में शामिल 259 पुरुषों में से लगभग 78 प्रतिशत पुरुष किसी न किसी रूप में तंबाकू, सुपारी या पान मसाला का सेवन कर रहे हैं। महिलाओं में भी यह आंकड़ा बेहद चिंताजनक है, जहां सर्वेक्षण में शामिल 184 महिलाओं में से 57.9 प्रतिशत महिलाएं इन उत्पादों का उपयोग कर रही हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, तंबाकू चबाने की उच्च प्रवृत्ति के कारण ग्रामीणों में मुख कैंसर (ओरल कैंसर), मुख उपश्लेष्मिक तंतुमयता (ओरल सबम्यूकस फाइब्रोसिस), ल्यूकोप्लाकिया और मसूड़ों की बीमारियों का जोखिम काफी बढ़ गया है। इसके साथ ही फेफड़ों के कैंसर, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी), अस्थमा, हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, हृदयाघात (हार्ट अटैक) और स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ता जा रहा है। भारत में मुख कैंसर के अधिकांश मामले सीधे तौर पर तंबाकू और सुपारी के सेवन से ही जुड़े होते हैं। स्वास्थ्य जोखिमों के अलावा, यह भी सामने आया कि उपभोक्ता प्रतिदिन औसतन 20-25 रुपये तंबाकू उत्पादों पर खर्च कर रहे हैं, जो उनके परिवारों पर एक बड़ा आर्थिक बोझ डाल रहा है।
सर्वेक्षण पूरा होने के बाद चिकित्सकों द्वारा ग्रामीणों को तंबाकू के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक किया गया और उन्हें व्यसन छोड़ने के लिए प्रेरित करते हुए उपलब्ध परामर्श सेवाओं व स्वास्थ्य शिक्षा की जानकारी भी दी गई। यह पूरी सर्वेक्षण गतिविधि सामुदायिक चिकित्सा विभागाध्यक्ष डॉ. बी. एन. मिश्रा के मार्गदर्शन में संपन्न हुई। इस कार्य में तृतीय वर्ष के स्नातकोत्तर विद्यार्थी डॉ. जागृति बहरानी, डॉ. सपना राठौर, डॉ. नितिन भार्गव, डॉ. राघवेंद्र सिंह बघेल, डॉ. सुधा गौंड और डॉ. हरि सिंह जाटव के साथ ही प्रथम वर्ष के स्नातकोत्तर विद्यार्थियों और इंटर्न चिकित्सकों ने सक्रिय भूमिका निभाई। विभाग ने भविष्य में भी ग्राम स्तर पर ऐसे कैंसर जागरूकता, तंबाकू नियंत्रण और स्वास्थ्य संवर्धन कार्यक्रम निरंतर जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई है।



